माँ मुझे बड़े होते हुए फुले नही समाती थी
गर्व से सीना यू फूलाती थी !
मेरा बेटे के कदम बढ़ रहे है जवानी की तरफ
कुछ दिनो की बात है फिर मेरा राज है
बेटा बहू लाएगा ओर मेरा दूध का फर्ज निभाएगा !
मेरी इस ढलती उम्र मे कुछ आराम दिलाएगा
मेरे मूलधन का सूद पोते पोती के रूप मे चुकाएगा !
सोचा था माँ का सपना कुछ हद तक सफल भी होगा
मंजूर ए खुदा कुछ ऐसा होगा माँ खुश मेरा जीवन सफल होगा !
वक़्क्त के साथ कुछ ऐसा हुआ मेरे फेरे हुए माँ के अरमान पूरे हुए
पर आधुनिकता मे जीने वाली बहू के सहारे
मा के सपने चकनाचूर हुए !
खुद को बुद्धिजीवी समझने वाली पत्नी ने माँ के सपने कर दिये चकनाचूर
सास से ज्यादा माँ के गूणगान शुरू कर दिये !
बोलती पत्नी मेरी माँ जेसी कोई हो नही सकती
तेरी माँ जेसी क्रूर इस दुनिया मे मिल नही सकती !
तुम ही बताओ दोस्तो माँ -- ओर माँ मे इतना फर्क क्यू
पति की सास ओर पत्नी की सास मे फर्क क्यू ?
जिस पति की सास ने पत्नी की सास के विरुद्ध समझाया है !
खुद की बेटी का भविष्य को दुखदायी बनाया है !
जो बहू सास को सन्मान न दे पायी है
लानत है तुझ पर तेने तेरी माँ की कोख लझाई है........... उत्तम जैन विद्रोही
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