भगवान महावीर
के सिदान्तो पर चलने वाले जैन धर्म के श्वेताम्बर तेरापंथ के वर्तमान आचार्य श्री महाश्रमण
अभी नेपाल प्रवास पर है ! अगला चातुर्मास
नेपाल के विराटनगर मे प्रस्तावित
है ! आचार्य महाश्रमण जी की यह यात्रा अहिंसा का मिशन लेकर देहली से शुरू
हुई ! आचार्य महाश्रमण भारत की पांच हजार वर्ष पुरानी उस समृद्ध
अहिंसापरम्परा के संबल संवाहक जीवंत व्यक्तित्व है जिनका दर्शन युग-युग तक
सम्पूर्ण विश्व का पथ दर्शन कर सकता है ! समय-समय पर
रह-रहकर सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं ऐसा वीभत्स एवं तांडव नृत्य करती रही हैं
जिससे संपूर्ण मानवता प्रकंपित हो जाती है। कुछ
सांप्रदायिक विद्वेष, नफरत एवं घृणा ने ऐसा माहौल बना दिया
है कि इंसानियत एवं मानवता बेमानी से लगने लगे हैं। अहिंसा की एक बड़ी प्रयोग भूमि भारत में आज
सांप्रदायिक की यह आग- खून, आगजनी एवं लाशों की ऐसी कहानी गढ़ रही है जिससे
घना अंधकार छा रहा है। चहूं ओर भय, अस्थिरता एवं अराजकता का माहौल बना हुआ है।जब-जब
इस तरह मानवता ह्रास की ओर बढ़ती चली जाती है, नैतिक मूल्य अपनी पहचान खोने लगते हैं, समाज
में पारस्परिक संघर्ष की स्थितियां बनती हैं, तब-तब कोई न कोई महापुरुष अपने दिव्य कर्तव्य, चिन्मयी
पुरुषार्थ और तेजोमय शौर्य से मानव-मानव की चेतना को झंकृत कर जन-जागरण का कार्य
करता है। भगवान महावीर हो या गौतम
बुद्ध, स्वामी
विवेकानंद हो या महात्मा गांधी, गुरुदेव तुलसी हो या आचार्य महाप्रज्ञ- समय-समय पर ऐसे अनेक
महापुरुषों ने अपने क्रांत चिंतन द्वारा समाज का समुचित मार्ग दर्शन किया। आज आचार्य महाश्रमण अहिंसा यात्रा द्वारा सिर्फ भारत मे ही नही नेपाल मे
भी मार्ग दर्शन प्रदान कर रहे है ! आचार्य महाश्रमण
अपने चिंतन को निर्णय व परिणाम तक पहुंचाने में बडे सिद्धहस्त हैं। उसी की
फलश्रुति है कि उन्होंने आचार्य महाप्रज्ञ को उनकी जनकल्याणकारी प्रवृतियों के लिए
युगप्रधान पद हेतु प्रस्तुत किया। महाश्रमण उम्र से युवा है, उनकी सोच गंभीर है युक्ति पैनी है, दृष्टि सूक्ष्म है, चिंतन प्रैढ़ है तथा वे कठोर परिश्रमी है। उनकी
प्रवचन शैली दिल को छूने वाली है। अब इस जटिल
दौर में सबकी निगाहें उन प्रयत्नों की ओर लगी हुई हैं जिनसे इंसानी जिस्मों पर
सवार हिंसा का ज्वर उतारा जा सके। ऐसा प्रतीत होता है कि
आचार्यश्री महाश्रमण की अहिंसा यात्रा इन घने अंधेरों में इंसान से इंसान को
जोड़ने का उपक्रम बनकर प्रेम, भाईचारा, नैतिकता, सांप्रदायिक सौहार्द एवं अहिंसक समाज का आधार प्रस्तुत करने को
तत्पर है।
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